जीजा ने मानी साली की ये बात तो पंचायत ने लगा दिया 11 लाख का जुर्माना, परिवार का हुक्का-पानी भी बंद

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जैसलमेर। रामगढ़ में जातीय पंचों द्वारा एक परिवार को समाज से बहिष्कृत कर उनका हुक्का पानी बन्द करने का मामला सामने आया है, जिससे दुखी होकर परिवार सामूहिक आत्महत्या करने की बात कह रहा है। इस संबंध में परिवार ने कलेक्टर-एसपी को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के जैसलमेर जिले के रामगढ़ मेघवाल पाड़ा निवासी भैराराम पुत्र फकीरा राम के खिलाफ जुलाई 2014 में खाप पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें उस पर जातीय पंचों ने 11 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। जातीय पंचों का उस परिवार पर लगातार दबाव बढ़ रहा था, जिससे मजबूर होकर उस परिवार को खाप पंचायत की बात माननी पड़ी।

आरोप है कि जातीय पंचों के दबाव में आकर भैराराम ने उसी माह दण्ड की कुल राशि में से पांच लाख रुपए एक जातीय पंच को सौंप दिए। इसके बाद पंचों ने फरमान सुनाया कि पूरे पैसे नहीं भरने तक यह परिवार समाज से बहिष्कृत रहेगा तथा इनका हुक्का पानी बन्द रहेगा।

भैराराम पुत्र फकीराराम ने जैसलमेर जिला कलेक्टर व जैसलमेर पुलिस अधिक्षक को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। भैराराम ने बताया कि उसकी साली सुमित्रा ने उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं होने का कहकर उपचार के लिए गुजरात के डीसा साथ चलने की बात कही। पारिवारिक सदस्य होने के नाते वह साली के साथ डीसा चला गया था, लेकिन सुमित्रा ने यह बात घरवालों को बताई या नहीं उसकी जानकारी उसे नहीं थी।

उनके जाने के बाद सुमित्रा के घरवालों ने भैराराम के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया और रामगढ़ पुलिस उसे डीसा से गिरफ्तार कर थाने ले आई। बाद में न्यायालय ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। जातीय पंचों ने झुठे मुकदमे में राजीनामा करने के लिए भैराराम पर 11 लाख का दंड लगा दिया। पांच लाख रुपए दण्ड स्वरूप भरवाए और बाकि दण्ड नहीं भरने तक समाज से बहिष्कृत कर हुक्का पानी बन्द करने का फरमान सुना दिया।

भैराराम व उसके पिता फकीराराम मेघवाल ने बताया कि उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। खाप पंचायत द्वारा जो राशि दण्ड के रूप में भरने के लिए कहा गया है वो राषि भरने में असमर्थ है। जातीय पंचों के फरमान के बाद भैराराम के पिता फकीराराम को दिल का दौरा पड़ गया था, जिसका उपचार चल रहा है। जातीय पंचों ने उस परिवार पर समाज में किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में जाने पर रोक लगा रखी है, जिससे यह परिवार सामाजिक व मानसिक रूप से उत्नीड़न का शिकार हो रहा है।

भैराराम ने बताया कि इस संबंध में पूर्व में रामगढ़ थाने में रिपोर्ट दी गई थी लेकिन पंचों द्वारा राजनैतिक दबाव बनाकर मुकदमा दर्ज होने ही नहीं दिया। पिछले पांच वर्षों से उनका परिवार मानसिक रूप से परेशान है और कभी भी सामूहिक रूप से आत्महत्या कर सकता है। भैराराम ने जातीय पंचों द्वारा दण्ड स्वरूप ली गई राशि ब्याज सहित दिलाने की जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है। पीड़ीत परिवार ने पचास से अधिक पंचों के खिलाफ पुलिस थाने में परिवाद दिया है।