पीएम मोदी की टिप्पणी के बाद शिवसेना ने पॉपुलेशन को लेकर मुस्लिमों को लिया निशाने पर, लेकिन आकड़े कह रहे कुछ और बयान अब आगे हो…..

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नई दिल्ली: लाल किले के प्राचीर से गुरुवार को 73वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देश की जनसंख्या को नियंत्रित करने की पहल की है। अपने भाषण में मोदी ने “जनसंख्या विस्फोट” पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे कई परेशानियां होती हैं। उन्होंने कहा कि परिवार को छोटा रखना भी देशभक्ति का काम है।

प्रधानमंत्री के इस भाषण के हवाले से शिवसेना ने मुस्लिम समुदाय को एक बार फिर से पॉपुलेशन को लेकर निशाने पर लिया। शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि अल्पसंख्यक समुदाय का एक तबका जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश लगाने का महत्व नहीं समझता है।

शिवसेना ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटा कर और मुस्लिमों में तीन तलाक की प्रथा पर रोक के लिए कानून बनाकर, प्रधानमंत्री ने एक संदेश दिया था। संपादकीय में कहा गया है, “इसलिए, वह जनसंख्या विस्फोट के मुद्दे को हल करेंगे और ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ अवधारणा को (कार्यान्वित) करेंगे।

मुसलमानों में भी प्रजनन दर घटी

धार्मिक आधार पर अगर हम आंकड़ों को देखें तो सभी धर्मों में प्रजनन दर में गिरावट देखी जा रही है। 2005-06 और 2015-16 के बीच के कालखंड को देखें तो हिंदुओं में प्रजनन दर 17.8%, मुसलमानों में 22.9%, ईसाइयों में 15%, सिखों में 19%, बौद्धों में 22.7%, जैनियों में 22.1% की गिरावट देखी गई है।

ऐसा देखा गया है कि शिक्षा का स्तर जितना बढ़ता है, प्रजनन दर उतना ही घटता है। भारत में खुशहाल जैन समुदाय की प्रजनन दर सबसे कम है।