विधायक सेंगर को लेकर सांसद साक्षी महाराज का बड़ा ऐलान, बीजेपी में मचा हड़कंप, बड़े नेताओं के संभाले भी नहीं संभल रही बात

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लखनऊ. अपने विवादित बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाले भाजपा सांसद साक्षी महाराज एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने भाजपा से निष्कासित किए जा चुके दुष्कर्म के आरोप विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का सपोर्ट करते हुए बयान दिया है।

औरैया में दुष्कर्म के आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर से जुड़े सवाल पर उन्नाव सांसद सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज ने कहा कि विधायक के मामले में मीडिया ट्रायल नहीं होना चाहिए था। दिबियापुर में प्रेस प्रतिनिधियों द्वारा विधायक कुलदीप सेंगर के होर्डिंग्स में आडवाणी एवं अमित शाह की फोटो लगे होने के सवाल पर सांसद साक्षी ने कहा कि यह मामला सीबीआई के पास है और न्यायालय में विचाराधीन है।

इस मामले पर न्यायालय में ट्रायल होना चाहिए था। मुद्दे पर मीडिया ट्रायल नहीं करना चाहिए। कांग्रेसी नेता द्वारा मीडिया कर्मी से अभद्रता किए जाने के सवाल पर कहा कि सपा एवं कांग्रेस को राष्ट्र से प्रेम नहीं है। उन्हें अलगाववादियों, पाकिस्तानियों से प्रेम है। इसलिए ये दोनों पार्टियां उनकी भाषा बोलती हैं। ऐसी राजनैतिक पार्टियों की वह घोर निंदा करते हैं और देशवासियों से अपील करते हैं कि वह इन पार्टियों को माकूल जवाब दें। ये है विधायक कुलदीप सेंगर प्रकरण

28 जुलाई 2019 को रायबरेली में पीड़िता की कार में टक्कर लगने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल दिया। इस हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो चुकी है। इस पहले 12 जुलाई 2019 को पीड़िता की मां ने सुप्रीम कोर्ट को एक पत्र भी लिखा था। जिसके आधार पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस मामले की सुनवाई की।

उन्नाव जिले के माखी थानाक्षेत्र की रहने वाली युवती ने भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर जून 2017 में बंधक बनाकर कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था।पीड़िता ने थाने में आरोपी विधायक के खिलाफ तहरीर दी थी लेकिन कार्रवाई करने की बात तो दूर पुलिस उसे टरकाती रही।

इसके बाद पीड़िता ने कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। उन्नाव जिले के माखी थानाक्षेत्र की रहने वाली युवती ने भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर जून 2017 में बंधक बनाकर कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। इसके बाद पिता की पुलिस कस्टडी में मौत हुई। पीड़िता ने मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया तो मामला सुर्खियों में आया था।

सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने विधायक को क्लीनचिट दे तो दी लेकिन परिवार, विपक्ष व समाजसेवियों के हंगामे के बाद केंद्र की मंजूरी पर सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की थी ।