करोड़ों रुपए खर्च कर ऐसे बिगाड़ी जा रही है राहुल गांधी और अखिलेश की छवि

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2012 के बाद लगातार 2014 तक राहुल गांधी की छवि पर हमला किया गया और यह दिखाने की कोशिश की गई कि राहुल एक नाकारा इंसान हैं।

यह हमला राहुल गांधी पर एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है, मौजूदा वक्त में राहुल गांधी के अलावा इसमें और भी बहुत से नाम जुड़ गए हैं। जैसे अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव यह सभी वह चेहरे हैं जो देश के अंदर युवा राजनीति के चेहरे बताए जाते हैं।

यह हमले 2014 के बाद बहुत तेजी से बढ़े हैं हाल ही में उत्तर प्रदेश के अंदर हुए विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिला था जिसमें सीधे तौर पर अखिलेश यादव और राहुल गांधी को टारगेट किया गया था।

मौजूदा वक्त में अगर आप सोशल मीडिया पर जाएं तो आपको खासकर राहुल गांधी पर आपत्तिजनक पोस्ट देखने को मिल जाएंगे।

अब ये हमले सिर्फ राहुल गांधी तक ही सीमित नहीं है यह पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनकी बेटी इंदिरा गांधी तक पर हो रहे हैं।

देश के पूर्व प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी तक को नहीं बख्शा जा रहा है और पोस्ट इतनी अश्लील और इतनी आपत्तिजनक है शायद आपको भी देख कर यकीन न हो उन पोस्टों में ऐसा झूठ बताया जाता है जिसे पढ़कर आपका भी दिमाग पलट जाए।

गांधी परिवार को सीधे तौर पर मुस्लिम परिवार बता दिया जाता है, गांधी परिवार को देश का सबसे घोटालेबाज परिवार भी बताया जाता है।

इसे अंग्रेजी में नेगेटिव मार्केटिंग का नाम दिया गया है नेगेटिव मार्केटिंग के तहत सोची समझी रणनीति के हिसाब से कुछ लोग एक बंद कमरे के अंदर बैठकर राजनीतिक फायदे के लिए इस तरह की पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल करने का काम करते हैं जिससे कि चुनावी फायदा मिल सके।

कैसे हुआ था खुलासा

हाल ही में यूट्यूब पर ध्रुव राठी ने अपनी वीडियो ब्लॉक किया था जिसमें उन्होंने बताया था कि कैसे भारतीय जनता पार्टी के अंदर काम कर रहे आईटी सेल में युवा दूसरी पार्टी पर हमला करते हैं और उनकी छवि बिगाड़ने की कोशिश करते हैं यूट्यूब ब्लॉक के बाद काफी बवाल हुआ था और ध्रुव राठी के ऊपर f.i.r. तक हो गई थी।

ध्रुव राठी के वीडियो ब्लॉग में आईटी सेल में काम कर चुके युवक ने बताया था कि कैसे सोशल मीडिया पर रणनीतिक तौर पर विपक्षियों पर हमला किया जाता है और इसके लिए मोटी रकम चुकाई जाती है।

कैसे मिलता है पैसा

आईटी सेल में काम करने वाले युवकों को पोस्ट के हिसाब से पैसा दिया जाता है जिसकी पोस्ट जितनी ज्यादा शेयर होगी उसको दाम उतने ही ज्यादा मिलेंगे।

यही नहीं चुनाव के वक्त हिंदू मुस्लिम हॉल बनाने के लिए आईटी सेल काम करता है, चुनाव के वक्त धर्म के नाम पर वोटों को बदला जा सके इस तरह से आईटी सेल आपके दिमाग के साथ आपकी सोच के साथ खेलता है।

भारत में बेरोजगारी का फायदा उठाकर राजनीतिक पार्टी इस तरह के षड्यंत्र कर रही हैं जिसमें बेरोजगार युवक अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं, आपको बता दें 2014 में भी सोशल मीडिया का जबरदस्त इस्तेमाल किया गया था और मौजूदा वक्त में जितने भी चुनाव होते हैं ज्यादातर सब सोशल मीडिया के तहत ही लड़े जाते हैं।

राजनीतिक पंडित बताते हैं अब राजनीतिक सभाओं से ज्यादा सोशल मीडिया का प्रभाव है अब वोटर सीधे मोबाइल पर उपलब्ध है और आप उससे संवाद कर सकते हैं इसी का फायदा राजनीतिक पार्टी बेहतरीन तरीके से उठा रही हैं।

फेसबुक पर ऐसे आपको हजारों ग्रुप मिल जाएंगे जिसके अंदर नेगेटिव मार्केटिंग की जाती है अभी बीते कुछ दिनों में रवीश कुमार जैसे पत्रकारों ने भी सामने आकर इसके खिलाफ आवाज उठाई थी।

मौजूदा वक्त में युद्ध जमीन पर नहीं लड़ा जाता युद्ध लड़ने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल सबसे अहम हथियार है इस वक्त मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के अंदर हो रहे चुनावों में भी आप देख सकते हैं कैसे सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जा रहा है कांग्रेस हो या भारतीय जनता पार्टी दोनों एक दूसरे पर हमला करने के लिए सोशल मीडिया का प्रयोग कर रहे हैं