सरकार के 2021 के बजट में मीडिया व मीडियाकर्मियों के लिये एक भी घोषणा नही: जेसीआई

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जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंड़िया की मांग अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर फेक न्यूज़ चलाने वाले पत्रकारों को न मिले किसी भी तरह का सहयोग जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया ने मीडिया पर लगी जीएसटी हटाने की करी मांग

जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंड़िया ने केंद्र सरकार के वर्ष 2021 के बजट में मीडिया व मीडियाकर्मियों के लिये एक भी घोषणा होने से निराशा व्यक्त की साथ ही केंद्र सरकार के रवैये पर दुख जताया है। जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग सक्सेना ने कहा कि आज के बजट से सरकार की मंशा साफ हो गयी है । देश के ज्यादातर नेता मीडियाकर्मियों को समाज का हिस्सा नही मानते उन्होंने कहा कि कोरोना काल व देश मे लगे लॉक डाउन से मीडिया उद्योग के हालात काफी खराब हो गए है।

मीडिया के हालात खराब होने से देशभर में विभिन्न समाचार पत्रों के कुछ प्रकाशन बंद हो गए और कई बंद होने की कगार पर है।इन संस्थानों में कार्य कर रहे पत्रकारों की या तो छंटनी हो गयी या उनकी तनख्वाह में कटौती कर दी गयी। सैंकड़ो लघु व मध्यम समाचार पत्रो का प्रकाशन बंद हो गया। संगठन के अध्यक्ष अनुराग सक्सेना ने कहा कि ऐसे समय मे केंद्र सरकार को मीडिया संस्थानो की मदद करनी चाहिए थी।उन्हे ज्यादा से ज्यादा विज्ञापन देने चाहिये थे, लेकिन केंद्र सरकार ने कोरोना काल मे मीडिया को विज्ञापन देने में ही कटौती शुरू कर दी।

आश्चर्य इस बात का है कि कोरोना काल मे जहाँ लगातार लोग इसका शिकार होकर मृत्यु के आगोश में जा रहे थे, उसी दौरान केंद्र सरकार के सूचना व प्रसारण मंत्रालय से जुड़े , डीएवीपी विभाग 2 नई नीतियां लेकर आयी। एक ऑनलाइन मीडिया की और दूसरी प्रिंट मीडिया की। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन मीडिया की विज्ञापन नीति का लाभ ज्यादातर बड़े पोर्टल चलाने वाले गैर मीडिया घरानों व प्रिंट मीडिया की नीति का फायदा सिर्फ बड़े मीडिया घरानों को ही होगा।

श्री सक्सेना ने केंद्र सरकार से दोनों नीतियों को रद्द करके उसकी जगह नयी लाभकारी नीति लाने की मांग की। इसी के साथ उन्होने मीडिया से जीएसटी हटाने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि जिस समय ये उद्योग बढेगा, उसी तरह से उसमे पत्रकारों के लिये नौकरियां बढ़ेंगी। नए प्रकाशन शुरू होंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मीडिया में एफडीआई पर भी रोक लगाने की मांग की है। संगठन के राष्ट्रीय सचिव श्री दानिश जमाल ने कहा कि ऑनलाइन मीडिया के पत्रकारों के समक्ष स्थानीय प्रशासन तरह तरह की बाधाएं खड़ी कर रहा है ।

देश मे कई पत्रकार, फेक न्यूज़ का सहारा लेकर , झूठी खबरे चला रहे है। उन्होंने कहा कि संगठन फेक न्यूज़ चलाने वाले पत्रकारो के कभी भी समर्थन में खड़ा नही होगा। उन्होने सरकार से मांग की है कि जिस तरह सरकार ने डिजिटल मीडिया को विज्ञापन देने की नीति बनाई है डिजिटल मीडिया के पत्रकारो को श्रमजीवी पत्रकार माना है उसी तरह सरकार डिजिटल मीडिया के रजिस्ट्रेशन की भी प्रक्रिया शुरू करे।