मुश्किल में मोदी सरकार, देश के हजारों गांव में नेताओं के घुसने पर रोक

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मांग पूरी ना होने तक गांव में नहीं घुस सकते नेता

राष्ट्रीय किसान महासंघ देश के 180 किसान संगठनों का सबसे बड़ा गैर-राजनीतिक समूह है। राष्ट्रीय किसान महासंघ द्वारा किये गए अनेक किसान आंदोलनों ने सरकार पर दबाव बनाया लेकिन सरकार द्वारा उठाये गए कदम पर्याप्त नहीं हैं।

चुनावों से पहले राजनीतिक पार्टियां बड़े-बड़े वादे करती हैं लेकिन चुनावों के बाद वो वादे भूला दिए जाते हैं. 2014 लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में लिखा था एवम पीएम मोदी जी ने भी अपने चुनावी भाषणों में यह कहा था कि अगर हम सत्ता में आये तो हम स्वमीनाथन कमीशन की रिपोर्ट लागू करेंगे।

किसानों ने इस वादे पर विश्वास करते हुए बीजेपी को वोट दिया एवम बीजेपी सत्ता में आई. सत्ता में आने के बाद 2015 में बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट में कानूनी शपथपत्र देते हुए कहा कि वो स्वमीनाथन कमीशन की रिपोर्ट लागू नहीं करेंगे, इस से देश के किसानों ने ठगा हुआ महसूस किया इसके बाद लगातार बीजेपी की सरकार ने कई किसान विरोधी फैंसले लिए।

इस से पहले 2006 में स्वमीनाथन कमीशन की रिपोर्ट आई थी और उस समय की कांग्रेस सरकार ने भी उसे लागू नहीं किया था।

देश का भोला-भाला किसान इन राजनीतिक पार्टियों के बहकावे में हर बार आ जाता है देश के किसानों का विश्वास राजनीतिक पार्टियों से उठ चुका है अपने गाँवों में राजनीतिक पार्टियों के लोगों को न घुसने देने का मन देश का किसान बना चुका है वर्तमान हालातों को समझते हुए राष्ट्रीय किसान महासंघ की आपातकालीन बैठक भोपाल में बुलाई गई।

देश के किसानों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय किसान महासंघ द्वारा यह किसान आंदोलन 20 दिसंबर से शुरू किया जा रहा है जिसमें उन सभी राजनीतिक पार्टियों का प्रवेश गाँवों में वर्जित होगा जो पार्टियां हमारी मांगों को पूरी करने का लिखित आश्वासन एक कानूनी शपथपत्र के साथ अपनी पार्टी के लेटरहैड पर नहीं देंगी।

जो राजनीतिक पार्टियां कानूनी शपथपत्र के साथ अपने चुनावी लेटरहैड पर लिखित में हमारी मांगों को पूरी करने का आश्वासन देंगी, सिर्फ उन्हीं राजनीतिक पार्टियों को हम अपने गाँवों में प्रवेश करनी की अनुमति देंगे।

देश के किसानों की प्रमुख मांगें –

1). किसानों को स्वमीनाथन आयोग के अनुसार उनकी फसल की लागत के आधार पर डेढ़ गुना लाभकारी मूल्य C2+50% के हिसाब से भुगतान किया जाए तथा देश की सभी फसलों को क्रय करने की गारंटी का कानून बनाया जाए।
2). देश के सम्पूर्ण किसानों को सम्पूर्ण प्रकार के कर्ज से मुक्त किया जाए।
3). फल, सब्ज़ी व दूध का MSP तय किया जाए।
4). देश के सभी किसानों की न्यूनतम आय (₹18000/महीने) सुनिश्चित किया जाए।

5). शिक्षित युवाओं के लिए रोजगार सुनिश्चित किया जाए।

20 दिसंबर से देश के हज़ारों गाँवों में बैठकें आयोजित की जाएंगी व ग्राम पंचायतें राजनीतिक पार्टियों को गाँव में न घुसने देने का संकल्प पत्र पारित करेंगी एवम गाँवों के प्रवेश द्वार पर राजनीतिक पार्टियों को चेतावनी देता हुआ यह बैनर लगा दिया जाएगा।