टीपू सुल्तान जिसके नाम से घबराते थे अंग्रेज, हिंदू बहनो ने बांधी थी टीपू को राखी

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टीपू सुल्तान भारतीय इतिहास का वह नाम जिसने अंग्रेजो को धूल चटा दी थी

टीपू सुल्तान भारतीय इतिहास की वह पहचान जिसने हिंदू मुस्लिम एकता के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी।

मैसूर के राजा और स्वतंत्रता सेनानी टीपू सुल्तान एक ऐसा नाम जिसे लेकर आजकल विवाद मचा हुआ है कोई कहता है टीपू सुल्तान हिंदू विरोधी था तो कोई कहता है टीपू सुल्तान जेहादी था लेकिन सच्चाई क्या है यह किसी को नहीं मालूम।

आज हम आपको बताते हैं हिंदुस्तान के उस राजा की कहानी जिसकी प्रजा में बहुसंख्यक हिंदू थे

जिसने हजारों हिंदू मंदिरों के लिए सरकारी खजाने का दरवाजा खोल दिया

जिस ने हिंदुओं की रक्षा के लिए अंग्रेजों के सर काट दिए थे।

टीपू सुल्तान का जन्म 10 नवंबर 1750 को युसूफबाद में हुआ था युसूफबाद बेंगलुरु से 33 किलोमीटर दूर है।

टीपू सुल्तान का पूरा नाम सुल्तान फतेह अली खान था और पिता का नाम हैदर अली था।

उनके पिता 1761 में मैसूर के शासक बने हैदर अली से पहले मैसूर साम्राज्य के सेनापति थे और अपनी काबिलियत से 1761 मैसूर के राजा बन गए।

उनके पिता के देहांत के बाद टीपू सुल्तान को इस गद्दी पर बैठा दिया गया और टीपू सुल्तान के बैठते ही अंग्रेजों का आवागमन भी हिंदुस्तान में तेज हो गया था।

जैसे-जैसे वक्त बीतता गया अंग्रेजों को भी टीपू सुल्तान का सामना करना पड़ा अंग्रेज मैसूर की गद्दी को हथियाना चाहते थे लेकिन वहां बैठे टीपू सुल्तान उनके आड़े आ जाता था।

अंग्रेज टीपू सुल्तान में दूसरा नेपोलियन देखते थे और उन्हें टीपू सुल्तान से खौफ भी लगता था।

टीपू सुल्तान की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह मुस्लिम होते हुए भी अपने प्रजा जिसमें बहुसंख्यक हिंदू थे उनकी बहुत इज्जत करता था।

हिंदू और मुस्लिम को एक निगाह से देखता था टीपू सुल्तान के राज की सबसे खासियत यह थी कि वह किसानों को बहुत इज्जत देता था यही वजह थी कि टीपू सुल्तान की प्रजा उसके साथ खड़ी थी।

जब एक बार अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान की हुकूमत को हिलाने की कोशिश की थी तो मैसूर की जनता हिंदू और मुस्लिम एक साथ आकर अपने राजा के साथ खड़े हो गए थे और राजा को आश्वस्त किया था कि आप परेशान ना हो हम इन से टक्कर ले सकते हैं।

टीपू सुल्तान ने गद्दी संभालने के बाद अपनी प्रजा को संभालने की बेहतरीन कोशिशें की थी टीपू सुल्तान को पता था कि उसके क्षेत्र में बहुसंख्यक हिंदू हैं और जब तक बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक दोनों खुश नहीं हो जाते उसको राज करना मुश्किल था इसलिए टीपू सुल्तान हमेशा हिंदू और मुस्लिम को एक साथ देखता था।

एक बार जब कुछ लोग टीपू सुल्तान के पास आए उन्होंने अपने राजा से कहा कि हम एक भव्य मंदिर बनाना चाहते हैं और हमें उसके लिए दान की आवश्यकता है उस वक्त टीपू सुल्तान ने अपने वजीर को आदेश देते हुए कहा था कि मंदिर का पूरा खर्च सरकारी खजाने से उठाया जाए उसके बाद जब मंदिर का निर्माण हो गया तब टीपू सुल्तान को बुलाकर मंदिर में सम्मान किया गया था।

मेलकोठ के मंदिर में आज भी कुछ सोने और चांदी के बर्तन है जिस पर नक्काशी की गई है बताया जाता है कि यह बर्तन टीपू सुल्तान ने मंदिर को भेंट किए थे।

1782 और 1799 में टीपू सुल्तान ने अपनी जागीर में जितने भी मंदिर थे उनको एक विशेष पैकेज दिया था साथ ही साथ सोने और चांदी की कई बड़ी बड़ी थालियां भी दी गई थी जिसमें लोगों को प्रसाद बांटा जा सके।

बताया जाता है कि टीपू सुल्तान की प्रजा में ऐसी बहुत सी महिलाएं थी जो टीपू सुल्तान को अपना भाई मानती थी और अक्सर रक्षा बंधन में और टीपू सुल्तान को राखियां बांदा करती थी।

एक बार टीपू सुल्तान के राज में किसी महिला के साथ बलात्कार हो गया था उस बलात्कारियों को टीपू सुल्तान की सेना ने पकड़ लिया वह टीपू सुल्तान के सामने लाया गया और टीपू सुल्तान ने उस महिला को भी बुलाया उस महिला से पूछा बहन इसको क्या सजा देनी चाहिए तब उस महिला ने कहा था किसकी गर्दन अलग कर देनी चाहिए उसके बाद टीपू सुल्तान ने सनी तलवार उठा कर उस महिला के हाथ में दी और कहा किस की गर्दन धड़ से अलग कर दो।

इस घटना के बाद पूरे इलाके में यह संदेश पहुंचाया गया था कि अगर कोई भी किसी महिला के साथ बलात्कार करता है तो उसको बख्शा नहीं जाएगा उसकी गर्दन कलम कर दी जाएगी यही वजह थी कि टीपू सुल्तान के राज में अपराध ना के बराबर थे जो अपराधी पकड़े जाते थे उनका अंजाम बुरा होता था।

आप सिर्फ टीपू सुल्तान से नफरत इसलिए नहीं कर सकते कि वह एक मुसलमान शासक थे